Bengal Polls : आज मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलेंगे TMC नेता, SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर पूछेंगे सवाल

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Bengal Polls :  पश्चिम बंगाल में इस महीने होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की सियासत में गर्माहट तेज है। इसका बड़ा कारण राज्य में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) भी है, जिसके चलते राज्य में राजनीतिक पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी अपने सातवें आसमान पर पहुंचा है। इसी बीच अब एसआईआर प्रक्रिया और मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जाने को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने आज यानी बुधवार को चुनाव आयोग से मुलाकात करने की तैयारी की है। पार्टी का कहना है कि यह प्रक्रिया कई लोगों के वोट देने के अधिकार को प्रभावित कर रही है।

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टीएमसी के राज्यसभा नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि उन्होंने सोमवार को चुनाव आयोग को पत्र लिखा था और मंगलवार को आयोग से मुलाकात के लिए समय मिला। इसके बाद आज बुधवार को चार सदस्यीय टीएमसी प्रतिनिधिमंडल में चुनाव आयोग से मुलाकात करेंगे। इस प्रतिनिधिमंडल में ओब्रायन, सकेत गोखले, मेणका गुरूस्वामी और सगरिका घोष शामिल होंगे।

ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करेंगे टीएमसी प्रतिनिधिमंडल

टीएमसी प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करेगा और उनके व्यवहार पर भी सवाल उठाएगा। ओ ब्रायन ने कहा कि हम केवल टीएमसी के लिए नहीं आए हैं, बल्कि उन लोगों की आवाज सुनाने आए हैं जिनके वोट छीनने की कोशिश की जा रही है। टीएमसी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के निर्देश पर नियुक्त बीडीओ, पुलिस पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी भाजपा के करीब हैं। इस तरह के कई मामलों को भी पार्टी सामने लाएगी।

सगरिका घोष ने आयोग पर लगाया गंभीर आरोप

वहीं सगरिका घोष ने कहा कि आयोग डरता हुआ और दबाव बनाने वाला व्यवहार कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक 27 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं, और इसमें से केवल दो लोगों ने न्यायिक प्रक्रिया के जरिए अपने नाम वापस पाये। डेटा के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया के बाद पश्चिम बंगाल में कुल लगभग 91 लाख वोटरों के नाम हटाए गए हैं।

गौरतलब है कि यह संख्या अक्तूबर 2025 के अंत में 7.66 करोड़ मतदाताओं की कुल सूची का लगभग 11.85 प्रतिशत है। ऐसे में ओ ब्रायन ने आरोप लगाया कि इतने बड़े पैमाने पर वोटर सूची से लोगों को हटाना गंभीर अपराध है। टीएमसी के नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग पूरी तरह से पक्षपाती हो गया है और वह नागरिकों के मतदान के अधिकार को प्रभावित कर रहा है।

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